Desi Sister Bade Boobs – दीदी और मौसेरी बहन दोनों को लंड चाहिए 3


Desi Sister Bade Boobs

नमस्कार दोस्तों मैं रियाज आपका अपना चोदु दोस्त, कैसे है आप लोग. आपने मेरी कहानी दीदी और मौसेरी बहन दोनों को लंड चाहिए 2 में पढ़ा होगा की कैसे मेरे जन्मदिन पर बहनों ने सिनेमा हॉल में मेरे लंड को ठंडा किया और दोस्तो आपने अभि तक मेरी कहानी में पड़ा की शाजिया दीदी सोने की एक्टिंग कर रहि थी और नगमा दीदी को चेक किया अब आगे. Desi Sister Bade Boobs

नगमा मेरे पास आई और मुझे धिरे से बोली भाई जान मैं तुरंत नगमा को पकड़ा और आंख मारते हुऐ अपनी ओर खींचा नगमा भी आँख मारने का जवाब आँख मारकर दिया उन्होने.. और फिर मुस्कुराती हुई सी वापिस दीदी की तरफ मूड गयी… कमरे मे नाइट बल्ब जल रहा था.

नगमा बहन सबसे पहले अपनी कपड़े उतारना शुरू की थोरी देर बाद नगमा ब्रा और पैंटी में हो गई और अपनी नाईट सूट पहनने लगीं मै तुरंत ही नगमा बहन को पकड़ा और बोला जान अब जरूरत नहीं है कपड़े पहने कि अभी तो ये दोनों भी खोलनी है मैं नगमा की ब्रा और पैंटी को बोला नगमा शर्मा गई और अपनी नाईट सूट से चेहरे को छुपाती हुईं मेरे बेड पर बैठ गई.

मैंने नगमा को ज़ोर से पकड़ा और अपने गले से लगा लिया.. नगमा ने छूटने का नाटक करते हुए कहा : “ये क्या कर रहे हो भैया… ऐसा करना ठीक नही है… तुम मेरे भाई हो आख़िर…” मेरा शक्ल देखने लायक हो गयी…आज पूरा दिन नगमा ने मेरे साथ जिस तरह से फ्लर्ट किया था, उन्हे अपने जिस्म से खेलने का अवसर दिया था… मेरे लंड का पानी निकाल के खाई और , उसके बाद नगमा का ये रवैय्या देख कर मैं भी सकते मे आ गये..

पर फिर भी थोड़ी हिम्मत करके मै बोले : “पर… पर …तुमने ही तो…. वहाँ थियेटर मे.. वो सब….” नागमा : “हां… वो तो है… उस वक़्त मैं बहक गयी थी… पर बाद मे सोचा कि ये सब करना ठीक नही है…” मैं भी बेचारा परेशान सा हो गया…. मै तो समझ रहा था कि शायद इस वक़्त कुछ और करने को मिलेगा.. पर नगमा के बदले दिल ने मेरे लंड के अरमानो पर पानी फेर दिया था.

नगमा ने मेरे चेहरे को देखा तो समझ गयी कि मैं सीरीयस होकर ये सब सोच रहा है मै मायूस होकर: “ओके…तुम कहती हो तो ठीक है…” मैंने बड़ी मुश्किल से, अपने दिल पर पत्थर रखकर ये बात कही थी. नगमा: “देखो भाई जान, मुझे बुरा मत समझना, वो सब मुझे भी अच्छा लग रहा था… इनफॅक्ट मेरा बस चलता तो मैं सब कुछ करने को तैयार हो जाती वहाँ पर.. लेकिन.. लेकिन…”

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मुझे जैसे रोशनी सी दिखी उसकी बात सुनकर… मैं तड़प कर बोला : “लेकिन क्या नगमा… बोलो…” नगमा: “लेकिन… किसी को पता चल गया तो सब गड़बड़ हो जाएगी…” मैं: “किसे पता चलेगा…. नही चलेगा… किसी को पता नही चलेगा नगमा… मेरा विश्वास करो… जब तक तुम या मैं किसी को ना बताए ये बात किसी को पता नही चलेगी… प्लीज़ नगमा..”

मैं एक तरह से गिडगिडा रहा था उसके सामने… और नगमा अपनी चाल चलकर मन ही मन खुश हो रही थी. नगमा ने सीरीयस सा मुँह बनाया और मेरा हाथ पकड़ कर बोली : “देखो भाई जान आपकी अम्मी-अबू से छुपाना आसान है, क्योंकि पूरा दिन वो लोग ऑफीस मे रहते है… पर ये शाजिया दीदी ये तो हमारे साथ हीही रहती है ना… इनसे छुपा कर रखना मुश्किल होगा…”

मैं भी ये सुनकर सोच मे पड़ गया… बात तो सही थी, ऐसे कब तक वो अपनी भावनाओ को काबू मे रख पाएँगे, एक दूसरे के सामने कभी ना कभी तो वो सामने आ ही जाएगा, और पकड़े जाएँगे. मैं : “तो तुम ही बताओ नगमा, इसका क्या सल्यूशन है… मैं तुम्हे पाने के लिए कुछ भी करने को तैयार हूँ…”

नगमा ने मेरी तरफ तिरछी नज़रों से देखा और एक नज़र साजिया दीदी पर डाली.. और बोली : ” देखो, तुम मेरी बात का ग़लत मतलब मत निकालना, पर यही एक तरीका है जिसके बाद हम वो सब कर सकते है जिसके लिए मैं और तुम तड़प रहे हैं..” मैं “हां.. हां… बोलो… मैं सुन रहा हूँ.. क्या प्लान है तुम्हारे दिमाग़ मे बोलो…”

नगमा : “तो सुनो जैसा रिश्ता तुम मेरे साथ चाहते हो, वैसा ही तुम साजिया दीदी के साथ करना होगा..यानी की पहले अपनी साजिया दीदी को चोद कर इनकी मुंह बंद करो ताकि वो हमारे बीच कोई अड़चन ना डाल सके..” ये सुनकर जय मेरी तो हँसी ही निकल गयी नगमा की प्लानिंग सुनकर..

क्या दिमाग़ लगाया था उन्होने, ऐसी हालत मे लाकर अगर किसी को भी बोलो तो वो भी अपनी बहन चोद सकता है लेकिन मेरी साजिया दीदी तो मेरा लंड कितना बार चूसी है मैं हंसते हुए नगमा से बोला बस इतना ही ये तो मेरी चुटकी का खेल है मैंने झट हां कर दी.. और सच कहूँ दोस्तो, मेरे हां का असर सीधा मेरे लंड पर हुआ…

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मेरा लंड सीधा खड़ा हो गया, मेरे हां सुनकर नगमा भी खुश हो गयी, और मेरे बेड पर लेट गई अब उनके हिसाब से सब चलने वाला था. मैं सीधे शाजिया दीदी की तरफ गया और दीदी जान की नाइट सूट उपर करने लागा मैं शाजिया दीदी को नीचे पुरा नंगी देख समझा गाया की दीदी जान भी जान बूझ के पैंटी नही पहनी हुई है.

मैं शाजिया दीदी की चूत को चाटने ही वाला था कि दीदी जान उठ गई और मेरे से बुरी तरह लिपट गईं और पलक झपकते ही वो एक गहरी स्मूच मे डूब गईं… अब मेरी आँखे पूरी खुल चुकी थी, अपनी बेहन को अपने साथ ऐसा करते देख मैं रोमांचित भी हो रहा था…अचानक साजिया दीदी ने वो किस तोड़ दी…

मैं तो और आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा था, दीदी की नाइट सूट उतारने की कोशिश कर रहा था.. शाजिया दीदी : “बस…. अभी के लिए इतना बहुत है… . ऐसा ना हो कि नगमा जाग जाए, उसने हमे ऐसा करते देख लिया तो मुश्किल हो जाएगी…” मैंने दीदी जान से बोला नगमा बहन किसी को कुछ नहीं कहेगी शाजिया दीदी बोली तुम्हे कैसे पता वो किसी से कुछ नहीं कहेगी.

मैं शाजिया दीदी को आपने ऊपर खींच लिया और बोला देखो नगमा कहा लेटी है अब शाजिया दीदी मेरे ऊपर थीं और मेरा लंड साजिया दीदी की चूत पर लगा हुआ था मैं धीरे से अपनी लंड को पकड़ के शाजिया दीदी की चूत की छेद में डालने लगा अभी मेरे लंड का टोपा अंदर गाया भी नहीं था कि साजिया दीदी तुरंत उठ गई.

दीदी के उठने से मेरा लंड थोड़ा सा अंदर गाया और फिर निकल गया दीदी जान उई अम्मी की सिसकारी निकाली और नगमा का हाथ पकड़ा और उसे लेकर वो सीधा मेरे बेड के करीब आई और बोली : “चलो…. शुरू हो जाओ… कर लो जो तुम्हारे मन मे है…” साजिया दी की ये बात सुनकर मुझे सच मे उनपर बहुत प्यार आया…

मन तो किया की अभी के अभी शाजिया दीदी की चूत में अपना लंड डाल शाजिया दीदी को चोदकर नगमा की चूत की भी धज्जिया उड़ा दूं… पर इस वक़्त ये सब करना पासिबल नही था, ऐसा करने से सयेद काम बिगड़ जाए अब नगमा ने एक नज़र शाजिया दीदी को देखी और फिर मेरी ओर देखी पर जो भी था, मज़े मुझे ही मिलने वाले थे, नगमा के मन मे भी हज़ारो लहरे उठ रही थी पर वो उनपर काबू करने की कोशिश कर रही थी…

शाजिया दी ने नगमा की ओर देखीऔर समझा गई की नगमा चुदवाना चाहती हैं लेकिन शर्मा रही है शाजिया दीदी मुस्कुराई और बोली लगता है आज मुझे हि भाई जान को बर्थडे गिफ्ट देनी पड़ेगी. साजिया दीदी नगमा बहन को बोली .मज़े लेने है तो बेशरम बनना पड़ेगा. और दीदी जान ने एक गहरी साँस ली और मेरे करीब आकर बैठ गयी, वो अब नगमा को देख ही नही रही थी..

उसका सारा ध्यान मेरी तरफ ही था…वो मुझपर झुकी और उसने अपने मोटे मम्मे मेरी छाती पर टिका कर मुझे एक किस कर दी मेरा तो रोम-2 पुलकित सा हो उठा.. और फिर एक पल के लिए रुककर उसने मेरे होंठों को अपनी जीभ से खोला और उन्हे फ्रेंच किस करने लगी… पहले धीरे-2 और फिर तेज़ी से… “Desi Sister Bade Boobs”

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उसके मुँह से अजीव-2 सी आवाज़ें निकल रही थी, गहरी साँसे लेते हुए वो मुझे बुरी तहरा से स्मूच कर रही थी… शायद अपने भाई और कज़िन के सामने मुझे इस तरह किस करने की बात उसे अंदर तक उत्तेजित कर गयी थी और उसी रोमांच और उत्तेजना मे भरकर वो मुझपर टूट पड़ी थी.. और अब मुझे भी कंट्रोल करना मुश्किल हो गया था, इसलिए मैं उठकर बैठ गया.

और साजिया दीदी को अपने सामने इस तरह से खड़ा देख कर मैने साजिया दीदी को अपने उपर खींचा और दीदी जान की चूत पर अपने लंड को रगड़ा तभी अब दीदी जान भी गरम हो चुकी थी फिर साजिया दी ने स्टेज संभाला और बोली : “देखो रियाज, मेरी पहली बार चुदाई हो रही है तो तुम आराम आराम से करना, और वो इसलिए भी ताकि ये बात हम तीनो के बीच ही रह सके और इसलिए भी ताकि हम एक दूसरे के सामने भी बिना शर्म के वो सब कर सके जो चोरी छुपे करने मे लगे थे..”

मैने उसकी बात से सहमति जताई.. नगमा भी अब तक सब कुछ समझ चुकी थी…. इसलिए शाजिया दी की बात ख़त्म होते ही मैं एक बार फिर से दीदी की चूत मे लंड की टोपा डालने लगा लगा. आज की रात हम तीनो भाई बहनो की लाइफ बदलने वाली थी. शाजिया दीदी ने जैसे ही अपना चेहरा मेरे सामने किया, मैने उसे ज़ोर से पकड़ा और उसके होंठों पर टूट पड़ा…

अब किस करने की बारी मेरी थी… मैं तो उसे अपने ऊपर दीदी जान को गिराकर उसके होंठों को चूस्ता चला गया… ऐसा लग रहा था जैसे प्लेट मे सजाकर उसके गुलाबी होंठ मेरे बेड पर सज़ा कर रख दिए है.. मैं उसके नर्म मुलायम बूब्स को मसलता हुआ उसके होंठो का रस्पान कर रहा था, ऐसा करते हुए मुझे एक अलग ही तरह की एग्ज़ाइट्मेंट हो रही थी.

मुझे ये बात भी ज़्यादा एग्ज़ाइट कर रही थी कि इस वक़्त नगमा मुझे घूर कर देख रही है… अपनी ही बेहन को मैं नगमा के सामने अपने अपने उपर लेटा के मसल रहा था.. साजिया दीदी ने जब देखा कि नगमा का सारा ध्यान उनकी ओर है तो वो शरमा गई और अपनी नजरे निचे मेरी ओर देखी और मेरे से लिपट गयी… “Desi Sister Bade Boobs”

और अपने होंठ मेरे कान के करीब लाकर बोली : “अब देखते ही रहोगे या कुछ करोगे भी… आइ आम बर्निंग फ्रॉम इनसाइड… कुछ करो ना भाई साजिया दीदी जब तड़प कर भैया बोली तो मेरा उत्तेजना एकदम भड़क उठी… मैंने दीदी को ज़ोर से अपनी बाहो मे भींच लिया और पागलो की तरह चूमने लगा…

शाजिया दीदी की नाज़ुक शरीर को हवा मे उठा कर अपनी छाती से उसके बूब्स को रगड़ने लगा…इसी बीच मेरे हाथ दीदी की नाईट सूट में घुस गये और मैने उसकी ब्रा कप्स को नीचे करके उसके बूब्स को आज़ाद कर दिया… मेरे हाथो मे एक बार फिर से उसके मोटे निप्पल आ गये जिन्हे मैं अपनी उंगलियो के बीच लेकर मसल्ने लगा…

साजिया दीदी ने अपने दोनो हाथ उपर कर दिए और पीछे पड़ा पिल्लो पकड़ कर धीरे से फुसफुसाई : “उम्म्म्ममम रियाज ……. सकक्क्क्क्क करो इन्हे….. प्लीज़ सक्क्क्क मी निपल्स…..” उसने ये बात बहुत धीरे से कही थी …मैने नगमा को देखा जो इस वक़्त अपनी बूब्स हल्के हल्के दबा रही थी उनका ध्यान हमारी तरफ नही था..

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मैने शाजिया दीदी की नाइट सूट और ब्रा पुरा निकाल दिया और पहली बार मैने शाजिया दीदी की बूब्स को नंगा देखा… एकदम अमरूद के आकार के थे वो… उसपर अंगूर जितने मोटे निप्पल लगे थे जो मेरे मसल्ने की वजह से कुछ ज़्यादा ही मोटे हो चुके थे… मैने जी भरकर उन्हे देखा और फिर उसके चेहरे को…

वो बेचैन होकर मुझसे अपने निप्पल्स की खुजली मिटवाना चाहती थी…मेरी तरफ से देरी होते देख कर उसने खुद ही मेरे सिर को पकड़ा और अपने बूब पर लगा कर ज़ोर से दबा लिया….मुझे ऐसा लगा जैसे मैने कोई बंगाली रसगुल्ला अपने मुँह मे भर लिया है, और उसमे से चाशनी निकल कर मेरे मुँह मे जा रही है. “Desi Sister Bade Boobs”

इतना रसीला और मीठा रसगुल्ला तो मैने रियल लाइफ मे भी नही खाया था…. मेरे दांतो ने उसके मोटे निप्पल पर शिकंजा जमा कर उसे कुतरना शुरू कर दिया.. मेरे दांतो की चुभन से उसका शरीर हवा मे उठने लगा… मैने बारी-2 से उसके दोनो बूब्स को उसी तरह से चूसा… अपने दांतो से उसके नर्म बूब्स पर मैने टॅटू भी बनाया जो एक हफ्ते से पहले जाने वाला नही था..

और जैसे ही मैं अपनी कलाकारी शाजिया दीदी के बूब्स पर करके नीचे दीदी की चूत पर गया मेरी नज़र नगमा पर गयी… उनकी नज़रें मुझे ही घूर रही थी मैं जैसे ही नज़रें झुकाने लगा तो मुझे एहसास हुआ कि उनकी नज़रें मुझे नही बल्कि शाजिया दीदी के नंगी चूत पर थी… .एक पल के लिए तो मैं भी चोंक सा गया… : “ ओर मै बोला नगमा शरमाओ मत…

ये सब तो अब आम बात रहेगी हम तीनों के बीच, एक दूसरे से शरमाते रहेंगे तो मज़े कैसे लेंगे.. आज से हम तीनों एक दूसरे के भाई बेहन नही बल्कि लवर बनकर रहेंगे.. और एक दूसरे के सामने कुछ भी करने से शरमाना नही है, वरना नुकसान तुम्हारा ही होगा..” इतना कह कर साजिया दीदी को फिर से अपनी छाती से लगा लिया और दीदी की दूध पिने लगा.

दीदी भी शायद मेरी बात समझ गयी थी… उसने अपने हाथ हटा कर एक बार फिर से अपने हुस्न को बेपर्दा किया और मुझे अपने उपर खींचते हुए फुसफुसाई : “आ जाओ अब रियाज…. अब चूसो उन्हे ज़ोर से…” ये बात तो नगमा ने भी सुनी… मुझे अपनी बेहन की इस बेशर्मी भरी बात को सुनकर मेरे बदन और भी ज़्यादा सुलग उठा और मैंने और तेज़ी से साजिया दीदी के बूब्स चूसने लगा… “Desi Sister Bade Boobs”

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दीदी ने अपना दाँया स्तन मेरी तरफ लहराया और बोली : “यहाँ… इसपर थोड़ा ज़्यादा ध्यान दो भाई… यहाँ ज़्यादा खुजली हो रही है… काटो उन्हे…चूस लो…” और उसी बात को सुनकर , मैने दी के दाँये बूब्स को मुँह मे भर लिया.. और उसे बुरी तरह से चूसने और चबाने लगा.. यानी जैसा-2 दीदी मुझसे करवा रही थी या मुझे बोल रही वैसे ही में दीदी को कर रहा था.

मैने एक कदम और आगे बढ़ने की सोची… और धीरे-2 मैने शाजिया दीदी के नीचे खिसकाना शुरू कर दिया.. और इस बार तो शाजिया दीदी का शर्म के मारे बुरा हाल था… शायद वो अभी के लिए इससे आगे नही बढ़ना चाह रही थी… अपने ही भाई के साथ वो पूरी तरह से चूत मे लंड नही लेना चाहती थी..

पर मैं भी जिद्दी था, मैने उसकी एक ना सुनी और उसके मना करने के बावजूद भी मैने अपने लंड को शाजिया दीदी कि चूत मे सेट कर दिया शाजिया दीदी शर्माकर अपने चेहरे को अपने हाथो से ढक लिया… बेचारी ये भूल गयी कि उसके ऐसा करने से दूसरो को तो दिखाई देना बंद नही हो गया था…अब आगे की कहानी भाग 4  में पढ़े.

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